Tuesday, October 30, 2012

शर्माओंगी तो नहीं, तुमको अपनी दिवानी कह दूं

आज इस महफिल में उल्‍फत की कहानी कह दूं
शर्माओंगी तो नहीं, तुमको अपनी दिवानी कह दूं

सितारों ने किया है मुकरर्र,अपनें वस्‍ल का दिन
अपनी मुलाकात को मैं , रूहानी कह दूं

देखता हूं तुमको तो रूह को सूकून ऑंखों को ठंडक आती है
क्‍या तुमको मैं , कश्‍मीर की पुरवा सुहानी कह दूं

देखो 'फ़राज़' पर फिर कोई इल्‍ज़ाम मत लगाना
तेरे रूखसार पे इक गज़ल, बोसों की जब़ानी कह दूं
राहुल उज्‍जैनकर 'फ़राज़'

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