Monday, September 20, 2010

Devaa Chee Maya....तोच जाणतो....

माग्च्या महेन्याची गोश्ट आहे, मी कामानी चाललो होतो... तीतक्यात पावसाला सूरवात झाली
आडोश्याला म्हणून एका दुकानाच्या शेड च्या खाली उभा झालो,
रसत्या च्या काठेला एक म्हातारी बसली होती,
त्या भर पावसात....सुद्धा !
मनांत किती तरी प्रश्न,धावा काढू लागले....
देव आहे कां ?
समजा तो आहे, म्हनटलं तर.....
एवढा निष्ठूर कां बरं ?
मागच्या जन्माचे पाप म्हणून आपण मोकळे होतो.....
खरचं, माग्चा किंवा पुढचा जन्म असतो ?
तरं मग, देवाला एकाच जन्मात, पाप वसूल करयची
एवढी घाई कां ?
दे त्याला १०-१२ जन्म अनं, करून...घे....वसूल
पण नकोरे....एवढे....दु:ख..........................!!!!
तसं पाहीलं तर, देव एवढा...निष्ठूर ही नाहीये....
एखाद्या सिंधी इसमाहून ही....१०० पटीनी...पूढे आहे..(म्हणूच तर आपण याला देव म्हणायचे)
त्यानी या म्हातारी ला दुःख तर दिले...पण
संवेदना मात्र हेरावून घेतली.....
जी काही संवेदना होती ती.... प्रेक्शका च्या मनांत...(अर्थात माझ्या)
आपल्याला ही देवा सारखे....(संवेदना शून्य होण्याचे) सामर्थ्य लाभो...
बघतो....मलां.....देव.....होता येतं कां ?
तो पर्यंत.....
.....हा ब्लाग आहेतच....मी एक सामान्य माणूस आहे म्हणून सांगायला...
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RAHUL UJJAINKAR
B-13, Atulanchal Parisar
Janki Nagar, Badi Ukhri
Jabalpur (M. P.)
INDIA. Mobile - +91998-160-1628

Poetry (my own)

ये रात कब खत्म होगी ?
___________________________

आज तुम्हारी सहमति मिली और मेरा मन अब मेरे काबू मे कहां उसने तो हवाओं का हाथ, थामकर छोटी-छोटी तितलियों का रुप धरा है.. और मेरी आंखो के सामने कितने ही, सलोने ख्वाब संजोये है ! तुम्हारा वो स्पर्श.... वो तुम्हारी बोलती आंखे.... वो अनकही बातें . . . लगता है जैसे, तुम सचमुच कह रही हो मुझे अब भी, बागों की माटी में तुम्हारे कदमों के निशान... साफ़ नज़र आ रहें है ! वो माटी भी, जैसे किन्ही खयालों मे खोगयी थी.. मानों उसकी भी मुरादें पूरी हो गयी हों मगर........ अपनी मुरादें कब पूरी होंगी ? दुनिया के निष्ठुर हांथ... अपनें अरमानों को कुचल तो नहीं देंगे ? ऐसे कितनें ही सवाल... मुझे सताते रहते हैं ! और आखीर कितनी देर ? ये रात बाकी रहेगी . . . . ये क्या ? . . . . . अभी सिर्फ़ आठ ही बजे हैं ? ..... मगर ऐसा लगता है ! जैसे ना जाने कितानी सदियां बीत गयी है! अभी १२ घंटे बाकी है, अपने मिलन को मगर ये दिल ... यही सोच रहा है..... ये रात कब खत्म होगी ? ...... ये रात कब खत्म होगी ? ...... =============== राहुल उज्जैनकर "फ़राज़

Sent from my Nokia phone

Thursday, July 22, 2010

दिल में किसी तम्‍ान्‍ना को आये साल हो गये


जितनें भी देखे थे सपनें हमनें, पूरे वो तमाम हो गये
मायूस अपनीं जिंदगी से, बेज़ार सपनों से फ़राज़ हो गये
काश रह जाता कोई अरमां, कोई सपना मेरा...अधूरा
दिल में किसी तम्‍ान्‍ना को आये,अरसा महिनो साल हो गये
राहुल उज्‍जैनकर फ़राज़ 


Thursday, July 01, 2010

काश मैं पंछी होता

काश मैं पंछी होता !!

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काश मैं पंछी होता
उडता खुले आकाश में
हवाओं से मैं बातें करता
उनसे उनकी कहानी सुनता
कुछ अपनी भी कहानी सुनाता
दूर देश की सैर को जाता, साथ अपनें
कुछ अनुभव लाता.....
किसी साथी से प्यार हो जाता..
उसके साथ दुनिया बसाता
फिर मेरे कुछ बच्चे होते, जब उनके...
पर नां निकले होते, तब उनका मैं....
हौसला बढाता, उंचे आकाश के किस्से सुनाता
इधर उधर की बातें करके.....
उनका अपना दिल बहलाता, कहते.......
पापा जल्दी आना..
साथ में ढेर सी बातें लानां, तब मैं उनसे कहता.....
बच्चों.....

अपनीं मां का कहना सुननां
शाम को जब मैं...
घर को आता, बच्चों को मैं जागा पाता....
कहते पापा.... कहानी सुनाओ !
इन्सानो का हाल बताओ ?
तब मैं....
उनसे कहता बच्चों......
इन्सानो का हाल ना पूछो !
कितना है बेहाल ना पूछो !
इक दुजे के खून का प्यासा.....
छोड चुका है सारी आशा...
नही रहा उसके पास कोई पर्दा..
छोड चुका वो सारी मर्यादा....
फिर मैं कहता सुनो बच्चों.........
इन्सानो की दुनिया नही है अच्छी.....
अपनी दुनिया ही है...
सीधी सच्ची....
अपनी दुनिया ही है, सीधी सच्ची....

(राहुल उज्जैनकर "फ़राज़")

सपनों में ही जिनें वाला मन.......

सपनों में ही जिनें वाला मन.......

मिलने कि आस मे तरसता हुआ मन
सपने संजोता आंखो से बरसता हुआ मन
कभी धुप कभी छांव को सहता हुआ मन
पांव के छालो सा रिसता हुआ मन

तनहाईयों मे खुशियो के मेले लगता मन
मिलन कि आरजु मे उसके घर के फेरे लगता मन
चेहरे पर ना जाने क्युं, चेहरे लगाता मन
इक उसी को पाने खातीर गमों को गले लगता मन


रुह को उसके आने की आहट सुनाने वाला मन
खुली बंद आंखो से निहारते रहने वाला मन
पलों के इंतिजार को सदियां कहनें वाल मन
हर पल इक नयी गज़ल गुनगुनानें वाला मन

अश्कों से गमों का दामन भिगोनें वाल मन
तेरे अनकहे सवालों क जवाब खोजनें वाला मन
तेरे ज़ानों मे ता उम्र की खुशी चाहनें वाला मन
गर है ये सपनां "फ़ारज़" तो सपनों में ही जिनें वाला मन
सपनों में ही जिनें वाला मन.......

राहुल उज्जैनकर "फ़राज़"

Monday, June 28, 2010

आज विचलित है तुम्हारा प्रेम प्रिये

आज विचलित है तुम्हारा प्रेम प्रिये, कल इसका,
परिणाम ना जाने क्या होगा ?



बचपन का हम प्रेम संभाले, जिये वर्षों एकाकी से !
प्रेम अपना अभिव्यक्त मगर, कर ना पाये बेबाकी से !

प्रसन्न होगी जब प्रेम देवी, अर्पण करूंगा उसपर तनमन !
हर एक वचन निभाने का, था प्रण किया मन ही मन !
क्युं साशंकित है देवि वो, मेरे विशवास का जाने क्या होग ? !!
आज विचलित है तुम्हारा प्रेम प्रिये, कल इसका,
परिणाम ना जाने क्या होगा ?

कितने तुफ़ान आये गये, ये हिसाब लगान मुश्किल है !
किसने कितनां दर्द सहा ये, तय कर पाना मुश्किल है !
साथी बनकर शाश्वत प्रेम की, ये नाव खेते जाना है !
इक दुजे की पतवार बनकर, ये जिवन पार लगाना है !
छोडोगी पतवार अगर, मझधार में जाने क्या होगा ? !
आज विचलित है तुम्हारा प्रेम प्रिये, कल इसका,
परिणाम ना जाने क्या होगा ?

भविष्य का हम सपनां देखे, आने वाले वर्षों का !
करें स्वागत सच्चे मन से, आने वाले हर्षों का !
अतित की बातें करके, क्युं दामन भीगोनां चाहती हो !
वर्तमान भी एक माया है, क्युं दुःखी होनां चाहती हो !
दीपक जलानां भूलोगी तो, तमस का जाने क्या होगा ?!
आज विचलित है तुम्हारा प्रेम प्रिये, कल इसका,
परिणाम ना जाने क्या होगा ?

राहुल उज्जैनकर "फ़राज़

ये रात कब खत्म होगी ?

ये रात कब खत्म होगी ?
___________________________

आज तुम्हारी सहमति मिली
और मेरा मन
अब मेरे काबू मे कहां
उसने तो हवाओं का हाथ थामकर
छोटी-छोटी तितलियों का रुप धरा है..
और मेरी आंखो के सामने
कितने ही, सलोने ख्वाब संजोये है !
तुम्हारा वो स्पर्श....
वो तुम्हारी बोलती आंखे....
वो अनकही बातें . . .
लगता है
जैसे, तुम सचमुच कह रही हो
मुझे अब भी, बागों की माटी में
तुम्हारे कदमों के निशान...
साफ़ नज़र आ रहें है ! वो माटी भी,
जैसे किन्ही खयालों मे खोगयी थी..
मानों उसकी भी मुरादें पूरी हो गयी हों मगर........
अपनी मुरादें कब पूरी होंगी ?
दुनिया के निष्ठुर हांथ...
अपनें अरमानों को कुचल तो नहीं देंगे ?
ऐसे कितनें ही सवाल...
मुझे सताते रहते हैं !
और आखीर कितनी देर ?
ये रात बाकी रहेगी . . . .
ये क्या ? . . . . .
अभी सिर्फ़ आठ ही बजे हैं ?
मगर ऐसा लगता है !
जैसे ना जाने कितानी सदियां बीत गयी है!
अभी १२ घंटे बाकी है,
अपने मिलन को मगर ये दिल ...
यही सोच रहा है.....
ये रात कब खत्म होगी ?
ये रात कब खत्म होगी ?
===============
राहुल उज्जैनकर "फ़राज़"

सब कहनें की बातें है

तुम हमारा साथ दोगे, सब कहने की बातें हैं !
उम्र भर साथ रहोगे ?, सब कहने की बातें हैं !

दिमाग मे चलनें वाला वल्वला है ये, ना कोई दिवानापन
मन का भटकना है ये फ़ितुर दिल का, ना कोई बंजारापन
उभरता है हर बार उल्टा, अक्स असली आइनें मे ही
सच बोलता है, हर पल आईना, सब कहनें की बातें है
तुम हमारा साथ दोगे......


बिछ्डकर किसी ना किसी से हम, जीते रहते हैं हरपल
करके बहाना मातम का हम, बस्स पीते रहते हैं हरपल
जीने वालों का साथ देते नही, मरनें वाले की बात क्या
प्यार, वफ़ा, दोस्ती और रिश्ते , सब कहने की बातें हैं
तुम हमारा साथ दोगे......


किसी के दामन मे फूल सजाना, सब से नहीं होता
किसी के आंसु अपनी आंख मे लेना, सब से नहीं होता
दौलत के गुरुर में सबके, कटवा देना इक इक हाथ
"फ़राज़" इश्क की मिसाल बनाना,सब कहनें की बातें है
तुम हमारा साथ दोगे......

राहुल उज्जैनकर "फ़राज़"

Thursday, June 10, 2010

HOW GOD SAVE US.....

दिनांक २०-०५-२०१०, दिन गुरुवार, समय २.१० दोपहर

एक दिन पहले शेखर का फोन आया कि कल भोपाल चल रहे हो क्या ? दुसरे दिन वापस आजायेंगे….मन के घुमक्कड पंछी ने कहा की चल बेटा राहुल घुम आते हैं! उसको तुरंत हां कहा और फोन काटा. पापा से पुछा की भोपाल चल रहे होक्या ? तो पापा ने मना कर दिया…. मैंने भी ज्यादा Force नही किया.. और Car धोने लगा.. बढीयां कार धोयी…. और भोपाल के लिये ready हो गया..

पहले शेखर को लेने उस के घर गया फिर Petrol Tank Full किया और Medical College की और चल पडे वहां से दिपक को लेना था (हम तीनों ही जानें वाले थे) उस को लेके सीधे Bypass की और चल पडे , सब कुछ आराम से चल रहा था.. शेखर नें नुसरत फ़तेह अली खां के गानें लगाये, हम लोग पूरा Enjoy कर रहे थे.. ५० कि. मी. जाने के बाद शहपुरा पुल पर हम लोगों का Photo Session हुआ ! जानें कितनें ही ऐंगल से Photo Session चलता रहा !





फिर हमारी यात्रा का आरंभ हुआ और हम लोग ६० कि. मी. और आगे गये… रास्ता इतना साफ़ था कि बस पूछो मत, गाडी की स्पीड भी अब ६०-६५ पर थी… कई छोटे छोटे पुल पार करते हुए आगे बढ रहे थे.. तभी अचानक ऐसा लगा कि आगे पुलिया के पास बडा सा गढ्ढा है। Speed कम करनें में यही कोई १५ Seconds लगे होंगे तभी गाडी यही कोई आधा फ़ीट गाडी उछलनें पर अपनां संतुलन खो बैठी और पास खडे truck के पिछे जा लगी……बस यहां से start होते हैं हमारे जिवन मरण के २० सेकेंड इन २० पलों में हमनें मौत को आमनें सामनें देखा….मेरी पूरी कोशीश के बावजूद गाडी रुकनें का नाम नही ले रही थी….विवश मजबूर और लाचार होके हम जैसे सिर्फ़ मौत का इंतजार कर रहे हों । परंतु ईश्वर नें हमारे लिये कुछ और ही सोच रखा था…ठीक २० seconds के बाद गाडी अपनें आप रूक गई….इन २० पलों मे हमें ना कुछ सुनाई दिया ना कोई आभास ही हो रहा था….२० पलों के बाद जैसे ही कार से बाहर आये…तो देखा की गाडी डेश बोर्ड तक truck के निचे जा चुकी थी…..






दीपक का चेहरा खून से पूरा लाल हो चूका था….मगर चोट क कहीं नामों निशान तक नहीं था । शेखर के टोढी से भी खून की धार बह रही थी…मैं steering से टकरा गया था शायद जिससे मुझे सिने पर चोट का एहसास हुआ मगर कोइ खून नही बह रहा था….चलनें पर मगर कुछ समय तक चला भी नही जा रहा था….जब हाथ की और ध्यान गया तब देखा की हाथ से तो खून तेजी से बह रहा है…खून वाली जगह में एक बडा सा छेद हो गया है.. ये जगह थी मेरी हथेली…तुरंत एक रद्दी कपडा दिपक से मांगा और हथेली पर पट्टी बना कर बांधी..उधर शेखर को चक्कर आने लगे थे….उसे back seat पर लिटाया और दिपक से कहा की उसे सोने नां दे , कुछ बात करते रहे…तब तक दिपक अपनां चेहरे का खून साफ़ कर चुका था…सर में चोट लगी थी उसके … करीब १/२ इंच का घाव था…

गाडी चलनें की अवस्था में बिलकुल भी नही थी….दिपक के फ़ोन से सबसे पहले फ़ोन किया भाभी जी को….कि वह किसी क्रेन वाले का इंतजाम करें और हम सभी ठीक है एवं चिंता की कोई बात नही है। ७ कि.मी. दूर थाना था वहां जाकर हादसे की FIR की गई । रात करीब ११ बजे क्रेन वाला आया और हम सभी सकुशल घर वापस आ गये…

मेरे Chest का x-ray निकालनें पर पता चला की मेरे Ribs की हड्डी मे fracture है । अब मैं घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहा हूं !

गाडी अभी वर्कशाप में खडी अपना स्वास्थ्य लाभ ले रही है…. सच में इश्वर हमें किस प्रकार बचायेगा ये सिर्फ़ वही जानता है….और हम सभी उस के चरणों में पुन: नतमस्तक हो गये…।


Horrible Experience in CMC Vellore, Tamil Nadu

Experience in CMC Vellore, Tamil Nadu
Hello Frnds,
My experience in CMC vellore is very horrible and terrible too, My close relatives was admitted in CMC Vellore for Fever treatment, they have facing problem that, in night Fever Raised about 104+ Celsius and as soon as sunrise fever also calm down. They search treatment in several hospitals but problem still there. Patient clear all Tests like. Happit. A , B , C and so on, MRI, CT-Scan, X-ray, all kind of Pathology test (as much as they can),AIDS, Dengu, Maleria, TB, Bone-marrow, Biopsy what nothing.. but all test show Negative Result and problem was as it is they can't find any solution or reason behind the fever, its really very silly that they even unable to find a clue ??, after several days pass suddenly hospital Dr. announce that patient suffering from severe immunity loss and we have to give him the antibiotic medicine, in starting they said we have to purchase more power-full does of antibio coz lower doses of antibio is like a water for your patient, we said ok as per Dr. guidance (what we should say on this ???). but after 2-3 days passed Dr. required more heavy doses of Antibio.. coz patient not responding on previous doses. Previously we purchase Approx Rs. 6000/ Injection (3 per day) after that they prescribe approx Rs. 20000/ injection (3 Per day) other than routine medicine. These treatment goes on several days in-between, patients health goes down and down, few days later Dr. again announced that patient had a infection in lungs we are trying to cure but we are unable to, after 2 more days they announced that due to heavy doses of Antibio patient will face kidney problem in future but it will curable (we have to believe this as we believe in GOD.) suddenly one morning we see that patient on ventilator……
After hour long discussion and arguing with Doctors we realized that we will lose our patient any time…. (What a terrible time that was…). Some more days passed, patient goes towards dialysis treatment… (Hours long process), which they give 2 in a 3-4 days… as per Doctor said we cant move our patient from CMC without ventilator, as we know that ventilator is not easy thing to move here and there, it means we have to stay as much as patients willpower,(as we know that no power will remain longer in this world) aur wahii hua jissa darr thaa…____/\/\/\/\/\/\/\/\/\/'-------------------- patient leave us alone. 
 (This is inside of CMC Vellore IICU Room)
Patient left behind 2 little daughters, wife and father in the early age of 45 Only. I have strong feeling that patient was dead just because of CMC vellore's experimental treatment….. They strongly believe that patients are like Rates for their experiment,
Please beware of CMC Vellore….. my humble request to you Plz don't go there


CMC Velloer

Dear sir/Madam,

I am in Hosur, I came for a SLE treatment last year to my wife for that i have one doubt, i called so many times, while i am calling i heard only recorded voice nobody attended my call then why they are giving the helpline numbers i don't know. this is too bad.

i am really sorry to say this because i had very good opinion on this hospital, i spent more than Rs 50, 000 last year for treatment, i feel very bad.

Source Website is http://www.consumercomplaints.in/complaints/cmc-hospitalvelloretn-c164029.html
we used this material just becasuse to prove...that, this blog is not a fake or misguiding anyone in any manner.

CMC Velloer Hospital (Dead Zone)

Worst Place of India, CMC Vellore Tamil Nadu- INIDA
The total aim of Vellore CMC Hospital is to grab the money from the patients. I have bad experience in this
I am totally upset with their service. Their main aim is to grab the money by keeping the name of Hospital.

I am really sorry to say this because I had good opinion on this hospital. The first time I entered and faced this kind of problem so I could not able to digest it. It shows their cheap culture and stupid tricks to make money.

173 days ago by Dilli Babu

never go to cmc vellore ...i lost my mother there ...more than one month stayed there...as as doctor i seen this hospital is only earning money...all staffs...specially nurses..behave inhuman ...i seen its having total system failure...most notorious ward is the surgery ward...my mother was behaving abnormally two days after splenectomy...her urine output was less than 300 ml in 24 hrs...i was frustrated requesting almost everybody from intern to the surgeon who did the operation to shift her to icu whole day ...i was crying ...but nobody was there to accept my words...nurses laughs when my mom shouts...but next day.when she become unconscious and statted gasping in the ward she was shifted to icu...and then the icu staff told that as she had cardiac arrest in the ward now chance is very less almost nill...next day she left us...as a doctor i will say my mother was really neglected there..specially in the surgery ward...this ir really a very ordinary hospital...its earning because of its old fame i think...so i advice all people specially people from west bengal and north east not to go there just to pour money to those stupid people ...there main income is from these places...they are very strict to get there bills ...that time they become private hospital...but when the question arises regarding reports and doctors visit then they become govt medical college...i have never met a real gentle man in the whole area in my one month stay...

Dr Ajoy Bhuyan

Source: http://www.consumercomplaints.in/complaints/cmc-hospitalvelloretn-c164029.html