Thursday, July 22, 2010

दिल में किसी तम्‍ान्‍ना को आये साल हो गये


जितनें भी देखे थे सपनें हमनें, पूरे वो तमाम हो गये
मायूस अपनीं जिंदगी से, बेज़ार सपनों से फ़राज़ हो गये
काश रह जाता कोई अरमां, कोई सपना मेरा...अधूरा
दिल में किसी तम्‍ान्‍ना को आये,अरसा महिनो साल हो गये
राहुल उज्‍जैनकर फ़राज़ 


Thursday, July 01, 2010

काश मैं पंछी होता

काश मैं पंछी होता !!

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काश मैं पंछी होता
उडता खुले आकाश में
हवाओं से मैं बातें करता
उनसे उनकी कहानी सुनता
कुछ अपनी भी कहानी सुनाता
दूर देश की सैर को जाता, साथ अपनें
कुछ अनुभव लाता.....
किसी साथी से प्यार हो जाता..
उसके साथ दुनिया बसाता
फिर मेरे कुछ बच्चे होते, जब उनके...
पर नां निकले होते, तब उनका मैं....
हौसला बढाता, उंचे आकाश के किस्से सुनाता
इधर उधर की बातें करके.....
उनका अपना दिल बहलाता, कहते.......
पापा जल्दी आना..
साथ में ढेर सी बातें लानां, तब मैं उनसे कहता.....
बच्चों.....

अपनीं मां का कहना सुननां
शाम को जब मैं...
घर को आता, बच्चों को मैं जागा पाता....
कहते पापा.... कहानी सुनाओ !
इन्सानो का हाल बताओ ?
तब मैं....
उनसे कहता बच्चों......
इन्सानो का हाल ना पूछो !
कितना है बेहाल ना पूछो !
इक दुजे के खून का प्यासा.....
छोड चुका है सारी आशा...
नही रहा उसके पास कोई पर्दा..
छोड चुका वो सारी मर्यादा....
फिर मैं कहता सुनो बच्चों.........
इन्सानो की दुनिया नही है अच्छी.....
अपनी दुनिया ही है...
सीधी सच्ची....
अपनी दुनिया ही है, सीधी सच्ची....

(राहुल उज्जैनकर "फ़राज़")

सपनों में ही जिनें वाला मन.......

सपनों में ही जिनें वाला मन.......

मिलने कि आस मे तरसता हुआ मन
सपने संजोता आंखो से बरसता हुआ मन
कभी धुप कभी छांव को सहता हुआ मन
पांव के छालो सा रिसता हुआ मन

तनहाईयों मे खुशियो के मेले लगता मन
मिलन कि आरजु मे उसके घर के फेरे लगता मन
चेहरे पर ना जाने क्युं, चेहरे लगाता मन
इक उसी को पाने खातीर गमों को गले लगता मन


रुह को उसके आने की आहट सुनाने वाला मन
खुली बंद आंखो से निहारते रहने वाला मन
पलों के इंतिजार को सदियां कहनें वाल मन
हर पल इक नयी गज़ल गुनगुनानें वाला मन

अश्कों से गमों का दामन भिगोनें वाल मन
तेरे अनकहे सवालों क जवाब खोजनें वाला मन
तेरे ज़ानों मे ता उम्र की खुशी चाहनें वाला मन
गर है ये सपनां "फ़ारज़" तो सपनों में ही जिनें वाला मन
सपनों में ही जिनें वाला मन.......

राहुल उज्जैनकर "फ़राज़"