Saturday, October 20, 2012

मुझे फिर ना बुलानें आना

जा रहे हो तो देखो, मुझे फिर ना बुलानें आना
सता चुके हो जी भरके,अब ना रूलानें आना
बमुश्किल समेटा है 'फ़राज',पलकों पे तूफां मैनें
अब न करनां याद,ना हिचकी के बहानें आना
राहुल उज्‍जैनकर 'फ़राज़'

4 comments:

  1. वाह...!
    इतना सब न होने पर भी कोई याद आये तो...!!!

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  2. क्या बात है....बहुत खूब सर!


    सादर

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  3. वाह बहुत खूब ...वैसे किसी शायर का एक शेर याद आ गया ...
    मुझे याद करने का यह मुद्दुआ था
    निकल जाए दम हिचकियाँ लेते लेते

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  4. धन्‍यवाद पुनम जी , यशवंत जी


    सादर

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