Sunday, September 23, 2012

जानें क्‍यूं रूक गया था कहते कहते ,आज सोचता हूं


शेर अर्ज है...............
ये अश्‍को की कहानियां है,लबों से बोली नही जाती
ऑंखों ने की है बगावत,पलकों से रोकी नही जाती
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                   गज़ल

जानें क्‍यूं रूक गया था कहते कहते ,आज सोचता हूं
थम सा क्‍यूं गया था बहते बहते, आज सोचता हूं

वक्‍त की रेत पर बिखर गये क्‍यूं सपनों के मोती
क्‍यूं थाम रहा था रेत को मुठ्ठी में,आज सोचता हूं

अज़नबी बनते गये,मेरे आस पास के सभी चेहरे
किस अपनें को खोजता रहा ता उम्र,आज सोचता हूं

उंची बोली लगी थी मेरे प्‍यार की,चुकाई नां गयी
क्‍यूं ना बेची 'फ़राज़-ए-वफ़ा' उस रोज,आज सोचता हूं

राहुल उज्‍जैनकर 'फ़राज़'

Thursday, September 20, 2012

क्‍या किया है कमाल मेरे खूने जिगर ने,जरा देख तो लूं

लाल सुर्ख है उसके पांव की मेहंदी,जरा देख तो लूं
क्‍या किया है कमाल मेरे खूने जिगर ने,जरा देख तो लूं

मद्दतों मेरे पहलू में रहा उमडती घटाओं की तरह
रक़ीब़ की बाहों में अब बरसना उसका जरा देख तो लूं

दिवानगी में भी हदों से पार न हुआ महफूज़ रहा
आज मगर बिखरनां उस जज्‍ब़ात का जरा देख तो लूं

था इल्‍म, तेरे वादे-वफा-मोहब्‍बत की रस्‍में सब फ़रेब़ है
अपनी इश्‍के वफ़ा का मौत-ए-लुत्‍फ जरा देख तो लूं

थी मेरी दिवानगी बिना दाम ही बिक गये हम फ़राज़
अब टके-टके पर मुस्‍कुराना उसका,जरा देख तो लूं
               लाल सुर्ख है पांव की मेहंदी......
राहुल उज्‍जैकनर 'फ़राज़'

Wednesday, September 05, 2012

इतने बेगैरत है दोस्‍त तो दुश्‍मनों की जरूरत किसे है

इतने बेगैरत है दोस्‍त तो दुश्‍मनों की जरूरत किसे है
आस्‍तीन में हो सांप तो ज़हर की जरूरत किसे है
मैं लुटा भी दूं इनपें अपनां इमानों दिल खुलकर,मगर
ज़मीर बेच आये है ये,अब ईमान की जरूरत किसे है

मेरे शहर की फिजाओ ने भी अब नूर बदलना सीख लिया
चेहरे पर नये नक़ाब लगाने की अब जरूरत किसे है
रोज के मिलनें वालें है ये,फिर भी पहचान दिखाते नहीं
भीड़ में मेरा नाम पुकारनें की अब जरूरत किसे है

मीनारें तन गई राहों में और मैदानों में मीनाबाज़ार
गांवों की सकरी गलीयों की अब जरूरत किसे है
बारूदों से तय होती है अब सरहदों की दूरियां
चैनों अमन की जिंदगी की,अब जरूरत किसे है

अपनीं गरज़ से बनते बिगडते है रिश्‍तों के मौसम
बचपन वाली मासूम बारीश की अब जरूरत किसे है
अब तो आदत हो गई है फराज कतरा कतरा मरनें की
यहां आकर जल्‍द जानें की अब जरूरत किसे है
राहुल उज्‍जैनकर 'फ़राज़'