Thursday, April 26, 2012

जिंदगी में कुछ कहनें को तज्रिबा बहोत जरूरी है
उतरनां तूफां में तो हौसला बहोत जरूरी है
कश्तियां तो सह लेंगी थपेडे इन तूफानों के
पहुंचना हो मंजिल पर तो साहिल बहोत जरूरी है

राहुल उज्‍जैनकर ''फराज''

Sunday, April 22, 2012

आर्या उज्‍जैनकर एवं अन्‍य


ब्‍लूमिंग फ्लावर विद्यालय के वार्षिक उत्‍सव में आयोजित कार्यक्रम में  आर्या उज्‍जैनकर एवं अन्‍य द्वारा एक फिल्‍मी गानें पर अभिनय किया गया............


पायली का सफर


इस यात्रा में शामिल लोग इस प्रकार हैं -
1- सुनिता
2- पूजा
3-दिक्षा 
4- अभिषेक विश्‍वकर्मा
5- अमित नेमा
6- लकी अग्रवाल
7- नवीन
8- और मैं (राहुल)
Jabalpur (जबलपुर)also known as shanskardhani is a city in the state of Madhya Pradesh in India.  Jabalpur is located in the Mahakoshal region in the geographic center of India. Jabalpur was the 27th largest urban conglomeration in India in 2001 (2001 Census). On a global scale, Jabalpur was the 325th largest city or urban area in the world in 2006 and Jabalpur is estimated to be 294th largest city in the world by 2020. Jabalpur stands 121st in term of the fastest growing cities and urban areas in the world in 2006. Jabalpur is the first district in India who has been obtained the comprehensive ISO-9001 certificate. This has come into force from April 1, 2007.

Bargi Dam is one of the first completed Dam out of the chain of 30 major dams to be constructed on Narmada River in Madhya Pradesh, India.
 Recently, M.P. Tourism has constructed a resort on the far right bank of the Bargi Dam (besides the Right Bank Canal Sluice). The resort, Maikal Resort,[2] is a small hotel mainly including 6 rooms (all air conditioned) and a restaurant. The view from each of these rooms is splendid as each of the rooms overlooks the Dam Water / Reservoir. Besides all these rooms, there is also a cruise in the reservoir water on a boat / cruise liner called as Narmada Queen. Also facilities like Speed Boating, Water Scooters, Paddle Boating, etc have been provided for the tourists. The main attraction of Bargi Dam and the surrounding area is the calm that the water provides by introducing a soothing feeling in oneself.

Payali is another side view of Bargi Damm..



Nagma ho
Yaadon mein
Palko pe boondein liye
Aaeina bani
Yeh aankhen teri

Dheemi se
Khusbu hai
Haawao ke jhokon ne jo
Chuke tujhe
Churaaayeee

Saanson ki
Raahon mein
Kya mile sakenge kabhi
Dhoonde tujhe
Nigahe meri

Saathi they
Janmo se
Rahon mein kyu kho gaye
Manzil humne
Bulane lagi

Nagma ho
Bhiga sa
Ya tum ho koi gazal
Har pal jise
Gungunata rahu

Hoton se
Hole se
Sargam jo bahne lagi
Aane lagi
Chahe meri 

Saturday, April 14, 2012

तब गजल बनती है......

कोई ये ना पूछे हमसे के गजल कब बनती है
टुटते है जब दिल दिवानों के तब गजल बनती है

जब हुस्‍न इश्‍क से टकराता है और नजर
नजर से टकराती है तब गजल बनती है

जब आंसू जुदाई के बहते हैं ऑंखों से और
दिल मिलनें को तडपता है तब गजल बनती है

जब मिलते मिलते बिछडते है दिवाने और
छुट जाता है साथी का साथ तब गजल बनती है

दिल लगाकर संगदिलों से जब 'फराज'
दिवानें होते है नाकाम तब गजल बनती है

राहुल उज्‍जैनकर ''फराज''



तो तूझे भूल जाउं मैं.....

किस कदर समायें है आप दिल में ये कैसे समझाउं मैं
तेरी याद दिलाती चिजों को मिटा दो तो तूझे भूल जाउं मैं

फूलों सा चेहरा है और फूलोंसी मुस्‍कान है तेरी
जहान से मिटा दो फूलों को तो तूझे भूल जाउं मैं

ये हवाये ही तो है जो लाती है खुश्‍बू तेरे बदन की
रोक सको इन हवाओं को तो तूझे भूल जाउं मैं

परिन्‍दो से ही सिखा है मैंने मोहब्‍बत में जान देना
मिटा दो गर परिन्‍दो को तो तूझे भूल जाउं मैं

देख समंदर की लहरें दिल में यादों के मंजर उभरते है
अब रोक सको इन लहरों को तो तूझे भूल जाउं मैं

ये मोहब्‍बत ही है 'फराज' जो  हर शै में दिखाती है अक्‍स तेरा
गर मिटा दो तुम मोहब्‍बत इस जहान से तो तूझे भूल जाउं मैं

राहुल उज्‍जैनकर ''फराज''


Sunday, April 08, 2012

दम भर तुझे देखनें के बाद


अरमानों का मेरे गुलशन खिला, तुझे देखनें के बाद
तुझको पाने की तमन्‍ना जाग उठी,तुझे देखनें के बाद

चॉंद सी सूरत है और तारों सी मुस्‍कुराहट है
खुदा की हर नयमत देखली,तुझे देखनें के बाद

तुझको नां पा सके  'फराज', तो खुदा ये हो जाये
दम तभी निकले मेरा,दम भर तुझे देखनें के बाद

राहुल उज्‍जैनकर 'फराज'

जर्द चेहरे पर हंसी आज ये लायी किसनें


जर्द चेहरे पर हंसी आज ये लायी किसनें
तश्‍नगी लब की मेरे फिर से जगायी किसनें

किसके ख्‍वॉबों में ,मैं रहता हूं खोया- खोया
दिल में मेरे नयी चाहत, ये जगाई किसनें

कौन आता है ये छम - छम की, सदाओं के साथ
बिते लम्‍हों को मेरे 'फराज', आवाज ये लगायी किसनें

राहुल उज्‍जैनकर ''फराज''

कल तक गुजरें उस मंजर के, खयाल अब भी ताजा है

कल तक गुजरें उस मंजर के, खयाल अब भी ताजा है
वो आलम अब भी जाता है, वो सवाल अब भी ताजा है

गुजरा है कोई शायद तूफान इस साहिल से
चेहरे पर अश्‍कों के ये निशान अब भी ताजा हैं

मरनें से पहले वो जरूर महबूब से मिला होगा
गली में उसके कदमों के ये निशान अब भी ताजा है

अभी-अभी तोडा है शायद, दम उस शक्‍स नें
बिस्‍तरों पर सिलवटों के ये निशान अब भी ताजा है

रात ढले किसीने उसकी कब्र पर चिराग जलाया होगा
दिन चढे चिराग बुझनें के ये निशान अब भी ताजा है

फिर कोई 'फराज', अपनें वक्‍त से पहलें मारा गया
उंगलियों पर गिनी उम्र का हिसाब अब भी ताजा है

राहुल उज्‍जैनकर ''फराज''

A Tribute to My Dearest Younger  Brother [Late "Mr. Ratnesh Ujjainkar" ]

अब जरूरी है किसी का बगावत करनां

अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
हो गया जुर्म हर किसीका मोहब्‍बत करनां
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
खोगया दौर कहीं वो मिलनें मिलानें का
अब नहीं ऑंसां किसी की सोहबत करनां
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
लोग करनें लगे बदनाम साथ चलनें पर
अब नहीं मुमकिन किसी को रूखसत करनां
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
सर झुका दूं सजदें में तो देते है अजाब
कैसे छोड दूं मैं भला अब, इबादत करनों
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
नब्‍ज देखूं किसी की तो मुझे कहते है फराश
अब नहीं आंसा 'फराज' किसी की तिबाबत करनां
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां

राहुल उज्‍जैनकर ''फराज''


ज़र्द चेहरे पर हँसी आज ये लायी किसने

जर्द चेहरे पर हॅंसी आज ये लाई किसनें
तश्‍नगी लब की मेरे फिर से जगायी किसनें

किसके ख्‍वॉबों में , मैं रहता हूं खोया-खोया
दिल में मेरे ये नयी चाहत जगायी किसनें

कौन आता है ये छम-छम की सदाओं के साथ
बिते लम्‍हों को 'फराज', ये आवाज लगायी किसनें

राहुल उज्‍जैनकर 'फराज'

बिछडनें में वक्‍त हैं नां ?

छोडोगे नहीं दामन मेरा बिछडनें में वक्‍त हैं नां
फरेब में तो नहीं रख रही मुझे,कहदो ये सच है नां

जिंदगी लगी है दांव पर मोहब्‍बत में ये झूठ नहीं है
नहीं है फरेब कोई तेरे प्‍यार में, कह दो ये सच है नां

तेरे वादे पे ही चला है 'फराज',  इतनी दूर मोहब्‍बत में
थाम कर गैर का हाथ चल नां दोगे, कहो ये सच है नां

राहुल उज्‍जैनकर 'फराज'

बेनाम ही सही पर ये रिश्‍ता तोडनां नहीं तुम

बेनाम ही सही पर ये रिश्‍ता तोडनां नहीं तुम
दिवाना जान अपनां ये साथ छोडना नहीं तुम

माना के चॉंद हो तुम और मैं जर्रा जमीं का
चॉंद भी होता पत्‍थर ही है,मुझसे जुदा नही हो तुम

आवाज आपके दिल की मेरे करीब से गुजरती नहीं
कहनां जो मर्जी हो पर मुझको बुरा कहनां नहीं तुम

''फराज'' खुद ही तेरी दुनिया से रूठनें वाला है अब
पर खुदा के लिये अभी मुझसे रूठनां नहीं तुम......

राहुल उज्‍जैनकर 'फराज'

Sunday, April 01, 2012

मरे सब्र की सीमा अब गुजर गई लगती है

मरे सब्र की सीमा अब गुजर गई लगती है
बात अब हद से आगे गुजर गई लगती है

जाने किस बात पर गुमांन है तुझे जानें नाज है किसपर
राजपाट है किस के दमपर, और सर ताज है किसपर
खामोश रहता हूं बाहर से ,मगर अंदर जलजला सा है
समेट कर रखी जो चिंगारी अग बिखर गयी लगती है
                         मेरे सब्र की सीमा अब गुजर गई लगती है

दौलत के गुरूर पर नहीं , प्‍यार पर गुजारा करतें है
खुदगर्जी के दौर में भी यारों खुद्दारी पर गुजारा करते है
मर्म को मेरे समझते तो,यूं मर्माहत ना होता 'फराज'
टीस अब मन में नफरत की यारों ,उतर गयी लगती है
                         मेरे सब्र की सीमा अब गुजर गयी लगती है
राहुल उज्‍जैनकर 'फराज'

(उन सभी मित्रों को समर्पित जिन्‍होंने अबतक मेरे सब्र की परीक्षा ली है .......... अब बस्‍स !! )