Friday, March 21, 2014

तेरी यादों के जुगनु


तेरी यादों के जुगनु जब निकलनें लगते हैं
जख्‍़म सारे दिल के फिर चमकनें लगते है

हर हसीं चेहरे मेँ बस तुम ही तुम नज़र आते हो
हुस्‍न वाले सारे मुझे , ख़रीददार लगनें लगते है
तेरी यादों के

जिस प्‍यार से तुमनें मेरे अरमानों का ख़ून किया
हाथों में गर फूल भी हो, मुझे ख़ंजर लगने लगते है
तेरी यादों के


बेसबब आजाता है जब तेरा नाम मेर होठों पर
मेरी ऑंखों में फिर, दर्द के समंदर भरनें लगते है
तेरी यादों के

फनां होकर भी फ़राज़ की दिवानगी नहीं जाती
राख के ढेर में भी चिंगारी ख़ोजनें लगते है
तेरी यादों के
© राहुल उज्‍जैनकर फ़राज़
 

मेरे जैसा तेरे दिल का भी हाल है नां

देख मेरे ऑखों के डोरे लाल हैं ना ?
मेरे जैसा तेरे दिल का भी हाल है नां ?

देख, बादमें कहीं फिर तुम मुकर न जाना
मेरे लबों जितनी तेरे लबों में भी आग हैं ना ?

देख, मेरे छुने भर से तुझे पिघल जाना है
मेरे जैसा ही , दिल तेरा भी मोम है ना ?

देख, सितारे तो करते रहेंगे साजिश अपनें खिलाफ
मेरी तरह, तुझे भी तक़दीर से लढनें का शौक है ना ?

देख, कितनें हसीन ख्‍वॉब फ़राज़ बुन लेता है
सौदागरों को मगर, इन्‍हे बेचनें का शौक है ना ?
© राहुल उज्‍जैनकर फ़राज़