Wednesday, October 24, 2012

मेरे जुनूं मेरे इश्‍के इबादत से तुमको क्‍या

मेरे जुनूं मेरे इश्‍के इबादत से तुमको क्‍या
वस्‍ल1 का इंतिज़ार हमनें किया,तुमको क्‍या

इक या'लूल2 की मानिंद था प्‍यार तेरा
रंजे उल्‍फत3 में खसूर4 हुआ,तुमको क्‍या

लबेखुश्‍क5 थे ढुढते रहे इश्‍क का चश्‍मः6 तुझमें
खस्‍तःदिल7 तो हमारा हुआ,तुमको क्‍या

कोतहा-नज़र8 अपनी थी,तेरा फरेब न दिखा
बनगये कोकहन9 तेरे लिये,तुमको क्‍या

रफ़ाहत10 की चाहत में बीक जाओगे सोचा न था
रफीके सफर11 अपना माना था,तुमको क्‍या

तेर बादाऐ शौक़12 ने 'फ़राज़' को माइल13 बना दिया
वस्‍ले इंतिजार मे कटेगी उम्र सारी,तुमको क्‍या
राहुल उज्‍जैनकर 'फ़राज़' 
1-मिलन ! 2-पानी का बुलबुला ! 3-प्रेम वेदना ! 4-दिवालिया, दिवाना 
5-बहुत प्‍यासा ! 6-पानी का झरना ! 7-दरिद्र जिसका हाल खराब हो
8-दूर तक न देखनें वाला ! 9-पहाड चिरनें वाला, फरहाद के लिये बोलते है
10-सुख चैन, ऐशो आराम ! 11-यात्रा का साथी, हमसफर 
12-प्रेम की मदिरा पीने वाला ! 13-आशिक, प्रेमी

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