Wednesday, March 27, 2013

दिल में अब दर्द ए मोहब्‍बत के सिवा कुछ भी नहीं

दिल में अब दर्द ए मोहब्‍बत के सिवा कुछ भी नहीं....................

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  1.  Dil Mein Ab Dard-e-mohabbat Ke Siwa Kuch Bhi Nahin
    Zindagi Meri Ibaadat Ke Siva Kuch Bhi Nahin

    Main Teri Baargah-e-naaz Mein Kya Pesh Karoon
    Meri Jholi Mein Mohabbat Ke Siwa Kuch Bhi Nahin

    Aye Khuda Mujh Se Na Le Mere Gunaahon Ka Hisaab
    Mere Paas Ashq-e-nadamat Ke Siwa Kuch Bhi Nahin

    Woh To Mit Kar Mujhe Mil Hi Gayee Rahat Warna
    Zindagi Ranj-o-museebat Ke Siwa Kuch Bhi Nahin

    लता मंगेशकर एवं जगजीत सिंह
    सज़दा एल्‍बम से 
  2.  

Tuesday, March 26, 2013

ये नज़राना तेरा भी है मेरा भी

ग़म का ख़जाना तेरा भी है मेरा भी




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गम का खज़ाना तेरा भी है मेरा भी
ये नज़राना तेरा भी है मेरा भी

अपनें ग़म को गीत बना कर गा लेना
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी

तू मुझको और मैं तुझको समझाउं क्‍या
दिल दिवाना तेरा भी है मेरा भी

शहर में गलियों गलियों जिसका चेहरा है
वो अफ़साना तेरा भी है मेरा भी

मैखानें की बात  नां कर वाईज़ मुझसे
आना-जाना तेरा भी है मेरा भी.....
जगजीत सिंह एवं लता मंगेशकर








Monday, March 11, 2013

वो ज़ख्‍म के जिसपर तूने,कभी मरहम नहीं लगाया


अपनी मोहब्‍बत का खज़ाना तेरे नाम लिखता हूं
ये गज़ले ये नज्‍़म ये आंसू तेरे नाम लिखता हूं

सजा लेना दामन में हर सितारा मेरी कहकशां का
तेरे यादों की पूरी दुनिया,ये तेरे नाम लिखता हूं

वो ज़ख्‍म के जिसपर तूने,कभी मरहम नहीं लगाया
नासूर वो सारे तेरी मोहब्‍बत के,तेरे नाम लिखता हूं

वो आंसू जो तेरी खुशी पर जज्‍ब़ कर लिये थे मैनें
समंदर उन अश्‍कों का आज, तेरे नाम लिख्‍ाता हूं

हर पल हर घडी काग़जों पर लिखता रहा बांते दिल की
हर राज-ए-दिल 'फ़राज़',आज तेरे नाम लिखता हूं
अपनी मोहब्‍बत का ख़जाना तेरे नाम लिखता हूं.......
राहुल उज्‍जैनकर फ़राज़

Thursday, March 07, 2013

इश्‍क पर ऐतबार कैसे होगा


लाल जोडे में हुस्‍न बहारों का जानें कैसा होगा
तेरे दिल में मेरे लिये, अब प्‍यार कैसा होगा

मुझसे तो लिपट जाते थे बे साख्‍ता आंधी बनकर
सोचता हू,अब तेरे मिलनें का वो अंदाज कैसा होगा


तुममें था सैलाब कोई या किसी सैलाब सी तुम
पलकों पे अब,तुफानों का वो मंज़र कैसा होगा

खोजते थे तुम,नाम अपना अक्‍सर मेरे शेरों में
गैर की ग़ज़ल बनने का,वो एहसास कैसा होगा

जानें कितनी ही शामें हमनें गुज़ार दी साहिल पे
मेरे जैसा तन्‍हा-बेबस, वो समंदर कैसा होगा

तुम तो चल दिये तोडकर,वादे-वफ़ा-रिश्‍ते सारे
ये ना सोचा बाद तेरे,इश्‍क पर ऐतबार कैसे होगा

इस कदर बेजार कर दिया फ़राज़ तेरी मोहब्‍ब्‍त नें
तेरे हर दर्द का इलाज़ अब चश्‍मे पुरनम से होगा
राहुल उज्‍जैनकर फ़ारज़