Monday, June 28, 2010

ये रात कब खत्म होगी ?

ये रात कब खत्म होगी ?
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आज तुम्हारी सहमति मिली
और मेरा मन
अब मेरे काबू मे कहां
उसने तो हवाओं का हाथ थामकर
छोटी-छोटी तितलियों का रुप धरा है..
और मेरी आंखो के सामने
कितने ही, सलोने ख्वाब संजोये है !
तुम्हारा वो स्पर्श....
वो तुम्हारी बोलती आंखे....
वो अनकही बातें . . .
लगता है
जैसे, तुम सचमुच कह रही हो
मुझे अब भी, बागों की माटी में
तुम्हारे कदमों के निशान...
साफ़ नज़र आ रहें है ! वो माटी भी,
जैसे किन्ही खयालों मे खोगयी थी..
मानों उसकी भी मुरादें पूरी हो गयी हों मगर........
अपनी मुरादें कब पूरी होंगी ?
दुनिया के निष्ठुर हांथ...
अपनें अरमानों को कुचल तो नहीं देंगे ?
ऐसे कितनें ही सवाल...
मुझे सताते रहते हैं !
और आखीर कितनी देर ?
ये रात बाकी रहेगी . . . .
ये क्या ? . . . . .
अभी सिर्फ़ आठ ही बजे हैं ?
मगर ऐसा लगता है !
जैसे ना जाने कितानी सदियां बीत गयी है!
अभी १२ घंटे बाकी है,
अपने मिलन को मगर ये दिल ...
यही सोच रहा है.....
ये रात कब खत्म होगी ?
ये रात कब खत्म होगी ?
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राहुल उज्जैनकर "फ़राज़"

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