Wednesday, November 07, 2012

प्‍यार को मेरे उसनें यारो हुक्‍का बना के रखा है

अपनीं गज़लों नज्‍़मों का हिस्‍सा बना के रखा है
जमानें के लिये मोहब्‍बत का किस्‍सा बना के रखा है
मेरे इश्‍क के नशे में हरपल गुडगुडाती रहती है
प्‍यार को मेरे उसनें यारो हुक्‍का बना के रखा है
राहुल उज्‍जैनकर 'फ़राज़'

आजकल वक्‍त मेरा साथ नहीं देता
खुद से बढ़कर,  कोई साथ नहीं देता
उम्रभर क्‍या निभाऐंगे वादे वफ़ा मुझसे
इक रात के लिये भी जो साथ नहीं देता
राहुल उज्‍जैनकर 'फ़राज'

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