Saturday, April 14, 2012

तो तूझे भूल जाउं मैं.....

किस कदर समायें है आप दिल में ये कैसे समझाउं मैं
तेरी याद दिलाती चिजों को मिटा दो तो तूझे भूल जाउं मैं

फूलों सा चेहरा है और फूलोंसी मुस्‍कान है तेरी
जहान से मिटा दो फूलों को तो तूझे भूल जाउं मैं

ये हवाये ही तो है जो लाती है खुश्‍बू तेरे बदन की
रोक सको इन हवाओं को तो तूझे भूल जाउं मैं

परिन्‍दो से ही सिखा है मैंने मोहब्‍बत में जान देना
मिटा दो गर परिन्‍दो को तो तूझे भूल जाउं मैं

देख समंदर की लहरें दिल में यादों के मंजर उभरते है
अब रोक सको इन लहरों को तो तूझे भूल जाउं मैं

ये मोहब्‍बत ही है 'फराज' जो  हर शै में दिखाती है अक्‍स तेरा
गर मिटा दो तुम मोहब्‍बत इस जहान से तो तूझे भूल जाउं मैं

राहुल उज्‍जैनकर ''फराज''


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