Sunday, April 08, 2012

अब जरूरी है किसी का बगावत करनां

अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
हो गया जुर्म हर किसीका मोहब्‍बत करनां
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
खोगया दौर कहीं वो मिलनें मिलानें का
अब नहीं ऑंसां किसी की सोहबत करनां
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
लोग करनें लगे बदनाम साथ चलनें पर
अब नहीं मुमकिन किसी को रूखसत करनां
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
सर झुका दूं सजदें में तो देते है अजाब
कैसे छोड दूं मैं भला अब, इबादत करनों
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां
नब्‍ज देखूं किसी की तो मुझे कहते है फराश
अब नहीं आंसा 'फराज' किसी की तिबाबत करनां
               अब जरूरी है किसी का बगावत करनां

राहुल उज्‍जैनकर ''फराज''


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