Saturday, August 05, 2017

कुछ खयाल बिखरे से....


बिछड़कर तुझसे लफ्ज़ भी, शरारत करने लगे
मैं तड़पने लगा, बिस्तर पे, वो ग़ज़ल कहने लगे
©®राहुल फ़राज़


मेरी किस्मत में कहां है
मोहब्बत की सोहबत देखो
करवटें इधर बदल रहा मैं,
तुम उधर जागती रही देखो
©®राहुल फ़राज़

सामने होती तो, तेरी पेशानी चूम लेता
ज़रा, मासूम है तरीका, मेरी ईबादत का ।
©®राहुल फ़राज़ 
 
चार पल क्या गुजार दिए, तेरी जानों पे
आजकल,शहंशाह बने फिरता हूँ, जमाने मे
©®राहुल फ़राज़ 

म्युझे कहाँ जीने की, आरज़ू है, फ़राज़
शर्त इतनी है, वो मरने को मजबूर करें
©®राहुल फ़राज़ 

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