Friday, July 07, 2017

कहा आतीं है ,रातों में नींद आजकल

कहां आतीं है मुझे, रातों में नींद आजकल
तुम्हे भी कहां फ़ुर्सत, की, ख्वाबों में आओ
समेट तो लूँ एक बार तुम्हे, अपनी बाहों में
मज़ाल है, कि, फिर तूम, निकल के जाओ
©®राहुल फ़राज़

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