Thursday, March 07, 2013

इश्‍क पर ऐतबार कैसे होगा


लाल जोडे में हुस्‍न बहारों का जानें कैसा होगा
तेरे दिल में मेरे लिये, अब प्‍यार कैसा होगा

मुझसे तो लिपट जाते थे बे साख्‍ता आंधी बनकर
सोचता हू,अब तेरे मिलनें का वो अंदाज कैसा होगा


तुममें था सैलाब कोई या किसी सैलाब सी तुम
पलकों पे अब,तुफानों का वो मंज़र कैसा होगा

खोजते थे तुम,नाम अपना अक्‍सर मेरे शेरों में
गैर की ग़ज़ल बनने का,वो एहसास कैसा होगा

जानें कितनी ही शामें हमनें गुज़ार दी साहिल पे
मेरे जैसा तन्‍हा-बेबस, वो समंदर कैसा होगा

तुम तो चल दिये तोडकर,वादे-वफ़ा-रिश्‍ते सारे
ये ना सोचा बाद तेरे,इश्‍क पर ऐतबार कैसे होगा

इस कदर बेजार कर दिया फ़राज़ तेरी मोहब्‍ब्‍त नें
तेरे हर दर्द का इलाज़ अब चश्‍मे पुरनम से होगा
राहुल उज्‍जैनकर फ़ारज़

3 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 09/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. धन्‍यवाद यशोदा जी

      सादर आ‍भार

      राहुल

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