Monday, May 07, 2012

जब सावन आया


हर पेडों पर नये पत्‍ते आये हर कली इक फूल बनीं 
मेरे दिल में उम्‍मीदों का गुलशन खिला जब सावन आया


पहाडों से दरिया बहे परिन्‍दों ने भी अब गाना गाया 
तरन्‍नुम मोहब्‍बत के फुटे मेरे दिल से जब सावन आया 


दिखनें लगे है अब घौसलें परिन्‍दों के हर इक डालों पर 
मुझमें भी तम्‍मनां घरौदें की जागी,जब सावन आया 


फूलों पर मंडराते भंवरे तितलियों का भी है अपना शोर 
मैं भी इक फूल चुनुं ऐसा लगा,जब सावन आया 


परिन्‍दों के जोडे अब तो रोज ही मेरे आंगन में आते है 
''फराज'' का भी कोई होता साथी ऐसा लगा जब सावन आया 
राहुल उज्‍जैनकर ''फराज'' 

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